सितंबर 2026
1अक्तूबर 2026
21- 9शुक्रमहालया · सर्व पितृ अमावस्यापितरों के लिए अंतिम दिन। भोर में देवी का आह्वान किया जाता है।2 दिन में
- 10शनिबतुकम्मातेलंगाना का फूलों का पर्व: नौ सांझ स्त्रियाँ बतुकम्मा सजाती हैं, उसके चारों ओर गाती हैं और उसे जल पर छोड़ती हैं; समापन दुर्गाष्टमी पर।10 अक्तू – 18 अक्तू
- 10शनिपुरट्टासी शनितमिल महीने पुरट्टासी के शनिवार, भगवान वेंकटेश्वर के लिए: केले के पत्तों पर तळिगै, माविळक्कु, तुलसी, और 'गोविंदा'।3 दिन में
- 11रविशारदीय नवरात्रिनौ रातें, हर दिन देवी का एक रूप।11 अक्तू – 19 अक्तू
- 14बुधविनायक चतुर्थीगणेश जी का मासिक व्रत, दोपहर की पूजा के साथ।7 दिन में
- 15गुरुललिता पंचमीनवरात्रि के पाँचवें दिन ललिता देवी का व्रत: देवी के रूप में करंडे का ढक्कन (करंड्याचे झाकण), अड़तालीस दूर्वा, और कथा व जागरण की रात।8 दिन में
- 15गुरुषष्ठी व्रतम्हर महीने भगवान मुरुगन की षष्ठी, शुक्ल पक्ष का छठा दिन: दिन भर व्रत, कंद षष्ठी कवचम्, और संध्या की पूजा।8 दिन में
- 16शुक्रदुर्गा पूजाघर में पाँच दिन: बेल के नीचे बोधन, घर में निवास, और दसवें दिन जल तक विदाई।16 अक्तू – 20 अक्तू
- 16शुक्रनवरात्रि सरस्वती पूजामूल पर पुस्तकों पर सरस्वती माँ का आवाहन, पूजन, उत्तराषाढ़ा पर बलि, और श्रवण पर विसर्जन।16 अक्तू – 19 अक्तू
- 18रविदुर्गा अष्टमीशारदीय नवरात्रि का आठवां दिन, जो देवी महागौरी की पूजा और कन्या पूजन के लिए समर्पित है।11 दिन में
- 18रविकाती बिहूकंगाली बिहू: तुलसी का पौधा रोपा जाता है, और उसकी जड़ में, घर भर में और पकते धान के बीच दीये जलाए जाते हैं, ताकि लखिमी घर आएँ।11 दिन में
- 19सोमआयुध पूजा और सरस्वती पूजाकिताबें, औज़ार और गाड़ी का पूजन — और फिर दसवें दिन तक अछूता।12 दिन में
- 19सोममहा नवमीनौवीं: सिद्धिदात्री, एक सौ आठ आहुतियों का हवन, और नौ रातों का समापन।12 दिन में
- 20मंगलमध्वाचार्य जयंतीआचार्य मध्व का जन्मदिन: श्री हरि के पास उनका चित्र, तुलसी, द्वादश स्तोत्र, और अन्नदान।13 दिन में
- 20मंगलविजयादशमी · दशहरादसवाँ दिन। विजय और नई शुरुआत।13 दिन में
- 25रविशरद पूर्णिमाचाँदनी में खीर।18 दिन में
- 25रविवाल्मीकि जयंतीआदि कवि का दिन: वाल्मीकि जी के चित्र की पूजा, रामायण का पाठ, और दान।18 दिन में
- 26सोमकार्तिक सोमवारकार्तिक के सोमवार, शिव जी के लिए, तारे निकलने तक।19 दिन में
- 27मंगलकृत्तिकाहर महीने भगवान मुरुगन का दिन, जिस संध्या चंद्रमा कृत्तिका में हो: दिन भर व्रत, उनके चित्र पर लाल फूल और घी का दीया, और संध्या का नैवेद्य।20 दिन में
- 28बुधअटला तड्डेसूर्योदय से चाँद तक निर्जला दिन, अटलु से पारण — उन्हीं छोटी दोसाओं से जिनके नाम पर यह दिन है।21 दिन में
- 28बुधकरवा चौथपति की लंबी आयु के लिए बिना अन्न-जल का दिन, भोर से पहले की सरगी से चाँद तक।21 दिन में
नवंबर 2026
34- 1रविअहोई अष्टमीसंतान के लिए माँ का व्रत: संध्या को दीवार पर अहोई माता की पूजा, और पहले तारों को अर्घ्य।25 दिन में
- 2सोममन्नारशाला आयिल्यममन्नारशाला नागराज मंदिर में सर्प पूजा, जिसमें मूर्ति की भव्य शोभायात्रा निकलती है।26 दिन में
- 5गुरुवसु बारस / गोवत्स द्वादशीदिवाली की पहली संध्या: गाय और बछड़े का पूजन, और पहले दीये।29 दिन में
- 6शुक्रधनतेरससाँझ को द्वार पर यम का दीया, और प्रदोष काल में लक्ष्मी माँ, कुबेर जी और धन्वंतरि जी की पूजा।30 दिन में
- 7शनिकाली चौदससंध्या को चौराहे पर वड़े, और रात को हनुमान जी की पूजा।31 दिन में
- 7शनिनरक चतुर्दशी · छोटी दिवालीसूर्योदय से पहले तेल-स्नान, और यम का दीया।31 दिन में
- 8रविबंदी छोड़ दिवसजिस दिन गुरु हरगोबिंद बाहर आए, और अकेले नहीं आए।32 दिन में
- 8रविदीपावली · लक्ष्मी पूजादीपों की रात। सूर्यास्त के बाद लक्ष्मी पूजन।32 दिन में
- 8रविकाली पूजाअमावस्या की आधी रात काली माँ की पूजा, जवा के साथ, और भोर तक जलते दीये।32 दिन में
- 8रविकेदारगौरी व्रतमशिव जी के लिए पार्वती माँ का अपना व्रत: इक्कीस धागों से लिपटा कलश, सब कुछ इक्कीस-इक्कीस अर्पित, और सांझ की पूजा के बाद बाँह पर गाँठों वाला धागा।32 दिन में
- 9सोमबलि प्रतिपदाबलि राजा का अपनी प्रजा के बीच एक दिन: अभ्यंग स्नान, पाँच रंगों या गोबर के किले में उनकी पूजा, और औक्षण।33 दिन में
- 9सोमबेसतु वरस · नव वर्षगुजराती वर्ष की पहली सुबह: भोर में रंगोली और सबरस, दर्शन, बड़ों का आशीर्वाद और साल मुबारक।33 दिन में
- 9सोमगोधनअन्नकूट, और गायें।33 दिन में
- 9सोमगोवर्धन पूजा · अन्नकूटद्वार पर गोवर्धन महाराज, श्रीकृष्ण के लिए अन्न का पर्वत, और गायों का पूजन।33 दिन में
- 9सोमस्कंद षष्ठीभगवान मुरुगन के लिए छह दिन का व्रत और कंद षष्ठी कवचम्, छठी संध्या सूरसंहारम् पर पूरे।9 नवं – 15 नवं
- 10मंगलभाई दूजबहन के घर भाई: अपराह्न में तिलक, और बहन के हाथ का भोजन।34 दिन में
- 10मंगलचित्रगुप्त पूजाअपराह्न में चित्रगुप्त जी के सामने कलम, दवात और बही-खाता।34 दिन में
- 13शुक्रछठसूर्य देव के चार दिन; अर्घ्य पहले सांझ, फिर भोर।13 नवं – 16 नवं
- 13शुक्रनागुल चवितिदीपावली के चार दिन बाद नाग पूजा: घर में नाग देवता की पूजा, बांबी में थोड़ा दूध, चलिमिडि और चिम्मिलि का भोग, और बच्चों के लिए व्रत।37 दिन में
- 14शनिलाभ पंचमीजिस दिन दुकान फिर खुलती है, और नए चोपड़े की पहली प्रविष्टि लिखी जाती है।38 दिन में
- 16सोमजलाराम बापा जयंतीबापा का जन्मदिन: उनकी छवि की पूजा, राम नाम, खिचड़ी, और किसी ज़रूरतमंद को भोजन।40 दिन में
- 16सोमकार्तिक पूजाकार्तिक की अंतिम संध्या कार्तिक ठाकुर: संतान की कामना से पति-पत्नी की पूजा, साँझ से भोर तक।40 दिन में
- 16सोममंडल कालम (व्रतम)वृश्चिकम् की पहली तारीख़ से मंडल पूजा तक, भगवान अय्यप्पा का इकतालीस दिन का व्रत।16 नवं – 26 दिसं
- 16सोमसामा-चकेवाछठ के पारण से कार्तिक पूर्णिमा पर सामा की विदाई तक, मिट्टी की चिड़ियों और भाइयों के गीतों की नौ रातें।16 नवं – 24 नवं
- 17मंगलगोपाष्टमीजिस दिन श्रीकृष्ण गोपाल बने, उस दिन गाय और बछड़े का पूजन।41 दिन में
- 18बुधआंवला नवमी (अक्षय नवमी)आँवले के वृक्ष की पूजा, और उसकी छाया में बना और खाया भोजन।42 दिन में
- 18बुधजगद्धात्री पूजावह देवी जो जगत को थामे हैं।42 दिन में
- 20शुक्रभीष्म पंचकदेवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक पाँच दिन: दिन-रात दीपक, भीष्म को जल, और हर दिन के फूल से विष्णु जी की पूजा।20 नवं – 24 नवं
- 20शुक्रदेवउठनी एकादशीविष्णु जी जागते हैं; विवाह आरंभ। इसके बाद तुलसी विवाह।44 दिन में
- 20शुक्रगुरुवायूर एकादशीकेरल की प्रमुख एकादशी, गुरुवायूरप्पन के लिए: चावल नहीं, उनके नाम, और हरिवासर के बाद पारण।44 दिन में
- 20शुक्रइगास बग्वाल (बूढ़ी दिवाली)गढ़वाल की ग्यारहवें दिन की दीपावली: देवताओं को पकवान, गाय-बैलों को पींडा और माला, और रात को भैलो।44 दिन में
- 21शनितुलसी विवाहसंध्या को तुलसी माता का शालिग्राम जी से विवाह, और परिवार द्वारा कन्यादान।45 दिन में
- 23सोमकार्तिगई दीपमकार्त्तिकै की कृत्तिका पर दीपों की कतारें।47 दिन में
- 24मंगलकार्तिक पूर्णिमा · देव दीपावलीदेवताओं की दिवाली।48 दिन में
दिसंबर 2026
1जनवरी 2027
5फ़रवरी 2027
1मार्च 2027
3अप्रैल 2027
9- 7बुधचैत्र नवरात्रिवसंत की नवरात्रि; विक्रम संवत आरंभ।7 अप्रै – 14 अप्रै
- 7बुधउगादि · गुड़ी पड़वाचंद्र नव वर्ष; भोर में गुड़ी खड़ी की जाती है।182 दिन में
- 14बुधबैसाखीफ़सल, और मेष संक्रांति।189 दिन में
- 14बुधराम नवमीश्री राम जन्म, मध्याह्न में।189 दिन में
- 14बुधपुथांडु · तमिल नव वर्षचित्तिरै एक।189 दिन में
- 14बुधविषुपहली रोशनी में विषुक्कणि।189 दिन में
- 15गुरुबोहाग बिहूअसमिया नव वर्ष।190 दिन में
- 15गुरुपोइला बैसाखबंगाली नव वर्ष।190 दिन में
- 20मंगलहनुमान जयंतीउत्तर में चैत्र पूर्णिमा; दक्षिण में मार्गऴि अमावस्या।195 दिन में
मई 2027
1जून 2027
2जुलाई 2027
3अगस्त 2027
6- 2सोमआदि पेरुक्कूआडि अठारह — नदियों को धन्यवाद।299 दिन में
- 4बुधहरियाली तीजहरियाली, झूले, सावन।301 दिन में
- 6शुक्रनाग पंचमीनागों को दूध।303 दिन में
- 16सोमरक्षा बंधनभद्रा के बाद, अपराह्न में राखी।313 दिन में
- 22रविखुदुरुकुणी ओषाअविवाहित ओडिया लड़कियों द्वारा अपने भाइयों की भलाई के लिए किया जाने वाला व्रत।319 दिन में
- 25बुधकृष्ण जन्माष्टमीआधी रात का जन्म। जागरण, फिर माखन।322 दिन में
सितंबर 2027
14- 2गुरुहरतालिका तीजपार्वती माँ का व्रत; रेत की मूर्तियाँ।330 दिन में
- 3शुक्रगणेश चतुर्थीबाप्पा दोपहर को घर आते हैं और जितने दिन आपका परिवार रखे, उतने दिन रहते हैं।3 सित – 4 सित
- 3शुक्रओणमदस दिन पूक्कलम, तिरुवोणम पर समापन।3 सित – 12 सित
- 4शनिनुआखाईपश्चिमी ओडिशा का कृषि पर्व, जिसमें मौसम की पहली धान की फसल का जश्न मनाया जाता है।332 दिन में
- 4शनिऋषि पंचमीसप्तर्षियों और अरुंधती के लिए व्रत, और बिना हल के उगे अन्न का एक समय का भोजन।332 दिन में
- 6सोमज्येष्ठा गौरीअनुराधा को गौरी आती हैं, ज्येष्ठा को भोजन, मूल को विदा।6 सित – 8 सित
- 7मंगलराधा अष्टमीभगवान कृष्ण की शाश्वत संगिनी देवी राधा के जन्मोत्सव का पर्व।335 दिन में
- 11शनिजल झूलनी एकादशीएक उत्सव जिसमें भगवान कृष्ण की मूर्ति को जल निकाय तक ले जाया जाता है।339 दिन में
- 11शनिकरम पूजाकरम की डाल, घर लाकर रात भर उसके सामने गान।339 दिन में
- 12रवितिरुवोणमवह दिन जब महाबलि घर लौटते हैं।340 दिन में
- 14मंगलअनंत चतुर्दशीचौदह गांठें। अंतिम विसर्जन।342 दिन में
- 17शुक्रविश्वकर्मा पूजाजिस दिन औज़ार विश्राम करते हैं और उनकी पूजा होती है।345 दिन में
- 21मंगलश्री नारायण गुरु समाधिजिस दिन श्री नारायण गुरु गए, और जो उन्होंने कहा वही स्मरण किया जाता है।349 दिन में
- 23गुरुजीवित्पुत्रिका · जितियासंतान के जीवन के लिए माँ का निर्जला व्रत — एक दिन और पूरी रात, पारण अगली सुबह।351 दिन में
अक्तूबर 2027
1अ से ज्ञ
अक्षय तृतीयाअटला तड्डेअनंत चतुर्दशीअहोई अष्टमीआदि पेरुक्कूआयुध पूजा और सरस्वती पूजाआंवला नवमी (अक्षय नवमी)इगास बग्वाल (बूढ़ी दिवाली)उगादि · गुड़ी पड़वाऋषि पंचमीओणमकरम पूजाकरवा चौथकाती बिहूकार्तिक पूजाकार्तिक पूर्णिमा · देव दीपावलीकार्तिक सोमवारकार्तिगई दीपमकाली चौदसकाली पूजाकृत्तिकाकृष्ण जन्माष्टमीकेदारगौरी व्रतमखुदुरुकुणी ओषागणेश चतुर्थीगुरु पूर्णिमागुरुवायूर एकादशीगोधनगोपाष्टमीगोवर्धन पूजा · अन्नकूटचित्रगुप्त पूजाचैत्र नवरात्रिछठजगद्धात्री पूजाजल झूलनी एकादशीजलाराम बापा जयंतीजीवित्पुत्रिका · जितियाज्येष्ठा गौरीतिरुवोणमतुलसी विवाहथाई पूसमदीपावली · लक्ष्मी पूजादुर्गा अष्टमीदुर्गा पूजादेवउठनी एकादशीधनतेरसनरक चतुर्दशी · छोटी दिवालीनवरात्रि सरस्वती पूजानाग पंचमीनागुल चवितिनिर्जला एकादशीनुआखाईपितृ पक्षपुथांडु · तमिल नव वर्षपुरट्टासी शनिपोइला बैसाखपोंगलबतुकम्माबंदी छोड़ दिवसबलि प्रतिपदाबेसतु वरस · नव वर्षबैसाखीबोहाग बिहूभाई दूजभीष्म पंचकभोगीमकर संक्रांतिमंडल कालम (व्रतम)मध्वाचार्य जयंतीमन्नारशाला आयिल्यममहा नवमीमहालया · सर्व पितृ अमावस्यामहाशिवरात्रिमोक्षदा एकादशी · गीता जयंतीरक्षा बंधनरथ यात्राराधा अष्टमीराम नवमीललिता पंचमीलाभ पंचमीलोहड़ीवट सावित्रीवसंत पंचमी · सरस्वती पूजावसु बारस / गोवत्स द्वादशीवाल्मीकि जयंतीविजयादशमी · दशहराविनायक चतुर्थीविश्वकर्मा पूजाविषुशरद पूर्णिमाशारदीय नवरात्रिश्रावण सोमवारश्री नारायण गुरु समाधिश्रीमंत शंकरदेव जन्मोत्सवषष्ठी व्रतम्सामा-चकेवास्कंद षष्ठीहनुमान जयंतीहरतालिका तीजहरियाली तीजहोलिका दहनहोली


