1. Library
  2. Aartis
  3. Om Jai Parshuram Ji Ki Aarti

Aarti · Vishnu ji

Om Jai Parshuram Ji Ki Aarti

आरती श्री परशुराम जी की

16 lines · 51 Chalisa Sangraha evam Aartiyan (Randhir Prakashan, Haridwar), book p150–151

Vishnu ji

Vishnu ji

The preserver; Ekadashi is his

ॐ जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी।

सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी॥

जमदग्नी सुत नर-सिंह, मां रेणुका जाया।

मार्तण्ड भृगु वंशज, त्रिभुवन यश छाया॥

कांधे सूत्र जनेऊ, गल रुद्राक्ष माला।

चरण खड़ाऊँ शोभे, तिलक त्रिपुण्ड भाला॥

ताम्र श्याम घन केशा, शीश जटा बांधी।

सुजन हेतु ऋतु मधुमय, दुष्ट दलन आंधी॥

मुख रवि तेज विराजत, रक्त वर्ण नैना।

दीन-हीन गो विप्रन, रक्षक दिन रैना॥

कर शोभित बर परशु, निगमागम ज्ञाता।

कंध चाप-शर वैष्णव, ब्राह्मण कुल त्राता॥

माता पिता तुम स्वामी, मीत सखा मेरे।

मेरी बिरद संभारो, द्वार पड़ा मैं तेरे॥

अजर-अमर श्री परशुराम की, आरती जो गावे।

'पूर्णेन्दु' शिव साखि, सुख सम्पति पावे॥