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Aarti · Durga Maa

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata

आरती श्री बगलामुखी जी की

13 lines · 51 Chalisa Sangraha evam Aartiyan (Randhir Prakashan, Haridwar), book p255

Durga Maa

Durga Maa

The Devi of Navratri

जय जय श्री बगलामुखी माता, आरति करहुँ तुम्हारी॥

पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छबि न्यारी॥

कर-कमलों में मुद्गर धारै, अस्तुति करहिं सकल नर-नारी॥

चम्पक माल गले लहरावे, सुर नर मुनि जय जयति उचारी॥

त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब, भक्ति सदा तव है सुखकारी॥

पालत हरत सृजत तुम जग को, सब जीवन की हो रखवारी॥

मोह निशा में भ्रमत सकल जन, करहु हृदय महँ, तुम उजियारी॥

तिमिर नशावहु ज्ञान बढ़ावहु, अम्बे तुमही हो असुरारी॥

सन्तन को सुख देत सदा ही, सब जन की तुम प्राण पियारी॥

तव चरणन जो ध्यान लगावै, ताको हो सब भव-भयहारी॥

प्रेम सहित जो करहिं आरती, ते नर मोक्षधाम अधिकारी॥

बगलामुखी की आरती, पढ़ै सुनै जो कोय।

विनती कुलपति मिश्र की, सुख-सम्पति सब होय॥