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Aarti

Jai Jai Tulsi Mata

आरती श्री तुलसी जी की

11 lines · 51 Chalisa Sangraha evam Aartiyan (Randhir Prakashan, Haridwar), book p230

जय जय तुलसी माता, सब जग की सुख दाता॥

सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर।

रज से रक्षा करके भव त्राता॥

बटु पुत्री हे श्यामा सुर बल्ली हे ग्राम्या।

विष्णु प्रिये जो तुमको सेवे सो नर तर जाता॥

हरि के शीश विराजत त्रिभुवन से हो वंदित।

पतित जनों की तारिणी तुम हो विख्याता॥

लेकर जन्म विजन में आई दिव्य भवन में।

मानवलोक तुम्हीं से सुख संपत्ति पाता॥

हरि को तुम अति प्यारी श्याम वर्ण सुकुमारी।

प्रेम अजब है उनका तुमसे कैसा नाता॥