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Aarti · Shri Krishna

Aarti Yugal Kishor Ki Kijai

आरती श्री गोपाल जी की · आरती जुगल किशोर की

10 lines · 51 Chalisa Sangraha evam Aartiyan (Randhir Prakashan, Haridwar), book p47

Shri Krishna

Shri Krishna

The flute, the butter, the Gita

आरती जुगल किशोर की कीजै, राधे तन मन धन न्यौछावर कीजै॥

रवि शशि कोटि बदन की शोभा, ताहि निरखि मेरा मन लोभा।

गौर श्याम मुख निरखत रीझै, प्रभु को स्वरूप नयन भर पीजै।

कंचन थार कपूर की बाती, हरि आये निर्मल भई छाती।

फूलन की सेज फूलन की माला, रतन सिंहासन बैठे नन्दलाला।

मोर मुकुट कर मुरली सोहै, नटवर वेष देखि मन मोहै।

ओढ़े नील पीत पटसारी, कुञ्ज बिहारी गिरिवरधारी।

श्री पुरुषोत्तम गिरवरधारी, आरती करें सकल ब्रजनारी।

नन्दनन्दन वृषभानु किशोरी, परमानन्द स्वामी अविचल जोरी।

आरती जुगल किशोर की कीजै, राधे तन मन धन न्यौछावर कीजै॥