1. पाठ
  2. आरतियाँ
  3. आरती श्री गोपाल जी की · आरती जुगल किशोर की

आरती · श्री कृष्ण

आरती श्री गोपाल जी की · आरती जुगल किशोर की

10 पंक्तियाँ · 51 Chalisa Sangraha evam Aartiyan (Randhir Prakashan, Haridwar), book p47

WhatsApp
श्री कृष्ण

श्री कृष्ण

बांसुरी, माखन, गीता

आरती जुगल किशोर की कीजै, राधे तन मन धन न्यौछावर कीजै॥

रवि शशि कोटि बदन की शोभा, ताहि निरखि मेरा मन लोभा।

गौर श्याम मुख निरखत रीझै, प्रभु को स्वरूप नयन भर पीजै।

कंचन थार कपूर की बाती, हरि आये निर्मल भई छाती।

फूलन की सेज फूलन की माला, रतन सिंहासन बैठे नन्दलाला।

मोर मुकुट कर मुरली सोहै, नटवर वेष देखि मन मोहै।

ओढ़े नील पीत पटसारी, कुञ्ज बिहारी गिरिवरधारी।

श्री पुरुषोत्तम गिरवरधारी, आरती करें सकल ब्रजनारी।

नन्दनन्दन वृषभानु किशोरी, परमानन्द स्वामी अविचल जोरी।

आरती जुगल किशोर की कीजै, राधे तन मन धन न्यौछावर कीजै॥