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आरती · श्री कृष्ण

आरती श्री श्याम जी की

14 पंक्तियाँ · 51 Chalisa Sangraha evam Aartiyan (Randhir Prakashan, Haridwar), book p156

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श्री कृष्ण

श्री कृष्ण

बांसुरी, माखन, गीता

ॐ जय श्रीश्याम हरे, प्रभु जय श्रीश्याम हरे।

निज भक्तन के तुमने पूरण काम करे॥

हरि ॐ जय श्रीश्याम हरे, गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे।

पीत बसन पीताम्बर, कुण्डल कर्ण पड़े॥

हरि ॐ जय श्रीश्याम हरे, रत्नसिंहासन राजत, सेवक भक्त खड़े।

खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जरे॥

हरि ॐ जय श्रीश्याम हरे, मोदक खीर चूरमा, सुवर्ण थाल भरे।

सेवक भोग लगावत, सिर पर चंवर ढुरे॥

हरि ॐ जय श्रीश्याम हरे, झांझ, नागारा और घड़ियावल, शंख मृदंग घुरे।

भक्त आरती गावें, जय जयकार करे॥

हरि ॐ जय श्रीश्याम हरे, जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।

सेवक जब निज मुख से, श्रीश्याम श्याम उचरे॥

हरि ॐ जय श्रीश्याम हरे, श्रीश्याम बिहारीजी की आरती, जो कोई नर गावे।

गावत दासमनोहर, मन वान्छित फल पावे॥