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आरती · श्री कृष्ण

आरती श्री राधा जी की

9 पंक्तियाँ · 51 Chalisa Sangraha evam Aartiyan (Randhir Prakashan, Haridwar), book p225

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श्री कृष्ण

श्री कृष्ण

बांसुरी, माखन, गीता

आरती श्री वृषभानुसुता की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की।

त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि।

पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम छवि सुन्दरता की।

मुनि मन मोहन मोहन मोहनि, मधुर मनोहर मूरति सोहनि।

अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि, प्रिय अति सदा सखी ललिता की।

संतत सेव्य सत मुनि जनकी, आकर अमित दिव्यगुन गनकी।

आकर्षिणी कृष्ण तन मन की, अति अमूल्य सम्पति समता की।

कृष्णात्मिका कृष्ण सहचारिणि, चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि।

जगज्जननि जग दुःखनिवारिणि, आदि अनादि शक्ति विभुता की।