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Aarti

Om Jai Jagdanandi (Narmada)

आरती श्री नर्मदा जी की

14 lines · 51 Chalisa Sangraha evam Aartiyan (Randhir Prakashan, Haridwar), book p265

ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी।

ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा शिव हरि शंकर रूद्री पालन्ती॥

देवी नारद शारद तुम वरदायक, अभिनव पदचण्डी।

सुर नर मुनि जन सेवत, सुर नर मुनि शारद पदवन्ती॥

देवी धूमक वाहन राजत वीणा वादयन्ती।

झूमकत झूमकत झूमकत झननन झननन रमती राजन्ती॥

देवी बाजत ताल मृदंगा सुरमण्डल रमती।

तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती॥

देवी सकल भुवन पर आप विराजत निशदिन आनन्दी।

गावत गंगा शंकर, सेवत रेवा शंकर तुम भव मेटन्ती॥

मैया जी को कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती।

अमरकंठ में विराजत, घाटन घाट कोटी रतन जोती॥

मैया जी की आरती निशदिन पढ़ि गावें, हो रेवा जुग जुग नर गावें।

भजत शिवानंद स्वामी जपत हरि मन वांछित फल पावें॥