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Aarti

Om Jai Gange Mata

आरती श्री गंगा जी की

11 lines · 51 Chalisa Sangraha evam Aartiyan (Randhir Prakashan, Haridwar), book p260

ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता।

जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥

चन्द्र सी ज्योति तुम्हारी जल निर्मल आता।

शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥

पुत्र सगर के तारे सब जग की ज्ञाता।

कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥

एक ही बार जो तेरी शरणागति आता।

यम की त्रास मिटाकर, परम गति पाता॥

आरती मातु तुम्हारी जो जन नित गाता।

दास वही सहज में मुक्ति को पाता॥

ॐ जय गंगे माता॥