1. पाठ
  2. आरतियाँ
  3. सुखकर्ता दुखहर्ता

आरती · गणेश जी

सुखकर्ता दुखहर्ता

14 पंक्तियाँ · बोलने में लगभग 2 मिनट · Traditional aarti (public domain)

WhatsApp
गणेश जी

गणेश जी

विघ्नहर्ता; सबसे पहले पूजे जाते हैं।

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।

सुख देने वाले, दुःख हरने वाले, जो विघ्न की बात ही मिटा देते हैं;

नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची॥

जिनकी प्रेम भरी कृपा कोई कमी नहीं छोड़ती, सब कुछ पूरा कर देती है।

सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।

सारे अंगों में सुंदर, सिंदूर का लेप लगाए हुए;

कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥

गले में मोतियों की माला चमकती है।

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।

हे देव, आपकी जय हो, जय हो; हे मंगलमूर्ति, आपकी जय हो।

दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥

दर्शन मात्र से मन की कामना पूरी हो जाती है।

रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।

हे गौरी के पुत्र, आप रत्नों से सजे हैं;

चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा॥

चंदन का लेप, कुमकुम और केसर।

हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा।

हीरों से जड़ा मुकुट सुंदर शोभा पाता है;

रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥

चरणों में घुँघरू रुनझुन बजते हैं।

लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना।

लंबे पेट वाले, पीतांबर धारी, नागराज की करधनी पहने;

सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना॥

सीधी सूँड़, टेढ़ा मुख, तीन नेत्रों वाले।

दास रामाचा वाट पाहे सदना।

राम का दास घर में आपकी राह देखता है;

संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना॥

संकट में आइए, अंत समय में रक्षा कीजिए, हे देवताओं से वंदित।