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आरती · गणेश जी

जय गणेश देवा

10 पंक्तियाँ · बोलने में लगभग 1 मिनट · Traditional aarti (public domain)

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गणेश जी

गणेश जी

विघ्नहर्ता; सबसे पहले पूजे जाते हैं।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

गणेश जी की जय हो, गणेश जी की जय हो, गणेश देवा की जय हो।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

जिनकी माता पार्वती हैं और पिता महादेव।

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।

एक दाँत वाले, दयालु, चार भुजाओं वाले।

माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥

माथे पर सिंदूर शोभा पाता है, और चूहे की सवारी है।

पान चढ़ै फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा।

पान चढ़ता है, फूल चढ़ते हैं, और मेवा चढ़ता है।

लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥

लड्डुओं का भोग लगता है, और संत सेवा करते हैं।

अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया।

अंधों को आँखें देते हैं, कोढ़ियों को निरोगी काया।

बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥

बाँझ को पुत्र देते हैं, और निर्धन को धन।

'सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।

सूरदास कहते हैं: हे श्याम, हम शरण में आए हैं, हमारी सेवा सफल कीजिए।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं।

इन दिनों पर