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स्तोत्र · शिव जी

शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्

12 पंक्तियाँ · बोलने में लगभग 1 मिनट · Shiva Panchakshara Stotram, attributed to Adi Shankaracharya

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शिव जी

शिव जी

शांत स्वरूप; सोमवार के देवता

१

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।

nāgendrahārāya trilocanāya bhasmāṅgarāgāya maheśvarāya .

जिनका हार नागराज है, जो त्रिनेत्र हैं, जिनके अंगों पर भस्म है, उन महेश्वर को;

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय ॥

nityāya śuddhāya digambarāya tasmai nakārāya namaḥ śivāya .

जो नित्य हैं, शुद्ध हैं, दिशाएँ ही जिनके वस्त्र हैं — उन न-कार रूप शिव को नमस्कार।

२

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।

mandākinīsalilacandanacarcitāya nandīśvarapramathanāthamaheśvarāya .

जो मंदाकिनी के जल और चंदन से चर्चित हैं, नंदीश्वर और प्रमथगणों के स्वामी उन महेश्वर को;

मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नमः शिवाय ॥

mandārapuṣpabahupuṣpasupūjitāya tasmai makārāya namaḥ śivāya .

मंदार और अनेक पुष्पों से पूजित — उन म-कार रूप शिव को नमस्कार।

३

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।

śivāya gaurīvadanābjavr̥ndasūryāya dakṣādhvaranāśakāya .

जो शिव हैं, गौरी के मुखकमल के लिए सूर्य हैं, दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले हैं;

श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नमः शिवाय ॥

śrīnīlakaṇṭhāya vr̥ṣadhvajāya tasmai śikārāya namaḥ śivāya .

नीलकंठ, जिनकी ध्वजा पर वृषभ है — उन शि-कार रूप शिव को नमस्कार।

४

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय ।

vasiṣṭhakumbhodbhavagautamāryamunīndradevārcitaśekharāya .

जिनके शिखर की पूजा वसिष्ठ, अगस्त्य, गौतम जैसे श्रेष्ठ मुनि और देवता करते हैं;

चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नमः शिवाय ॥

candrārkavaiśvānaralocanāya tasmai vakārāya namaḥ śivāya .

चंद्रमा, सूर्य और अग्नि जिनके नेत्र हैं — उन व-कार रूप शिव को नमस्कार।

५

यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय ।

yakṣasvarūpāya jaṭādharāya pinākahastāya sanātanāya .

जिन्होंने यक्ष का रूप धरा, जो जटाधारी हैं, जिनके हाथ में पिनाक है, जो सनातन हैं;

दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नमः शिवाय ॥

divyāya devāya digambarāya tasmai yakārāya namaḥ śivāya .

जो दिव्य हैं, देव हैं, दिगंबर हैं — उन य-कार रूप शिव को नमस्कार।

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।

pañcākṣaramidaṁ puṇyaṁ yaḥ paṭhecchivasannidhau .

जो इस पुण्य पंचाक्षर स्तोत्र को शिव जी के समीप पढ़ता है,

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥

śivalokamavāpnoti śivena saha modate .

वह शिवलोक पाता है और शिव जी के साथ आनंदित होता है।