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आरती · शिव जी

आरती श्री बटुक भैरव जी की

7 पंक्तियाँ · 51 Chalisa Sangraha evam Aartiyan (Randhir Prakashan, Haridwar), book p73

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शिव जी

शिव जी

शांत स्वरूप; सोमवार के देवता

जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा, सुर नर मुनि सब करते प्रभु तुम्हरी सेवा॥

तुम पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक, भक्तों के सुखकारक भीषण वपु धारक॥

वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी, महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी॥

तुम बिन शिव सेवा सफल नहीं होवे, चतुर्वंतिका दीपक दर्शन दुःख खोवे॥

तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी, कृपा कीजिये भैरव करिये नहिं देरी॥

पाँवों घूंघरू बाजत डमरू डमकावत, बटुकनाथ बन बालक जन मन हरषावत॥

बटुकनाथ की आरती जो कोई जन गावे, कहे 'धरणीधर' वह नर मन वांछित फल पावे॥