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स्तोत्र · शिव जी

लिंगाष्टकम्

18 पंक्तियाँ · बोलने में लगभग 1 मिनट · Traditional; the Lingashtakam

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शिव जी

शिव जी

शांत स्वरूप; सोमवार के देवता

१

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।

brahmamurārisurārcitaliṅgaṁ nirmalabhāsitaśobhitaliṅgam .

ब्रह्मा, विष्णु और देवताओं से पूजित लिंग; निर्मल प्रकाश से शोभित लिंग;

जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥

janmajaduḥkhavināśakaliṅgaṁ tat praṇamāmi sadāśivaliṅgam .

जन्म से उपजे दुःख का नाश करने वाला लिंग — उस सदाशिव लिंग को प्रणाम।

२

देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।

devamunipravarārcitaliṅgaṁ kāmadahaṁ karuṇākaraliṅgam .

देवताओं और श्रेष्ठ मुनियों से पूजित लिंग; काम को भस्म करने वाला, करुणा का भंडार लिंग;

रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥

rāvaṇadarpavināśanaliṅgaṁ tat praṇamāmi sadāśivaliṅgam .

रावण का दर्प चूर करने वाला लिंग — उस सदाशिव लिंग को प्रणाम।

३

सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।

sarvasugandhisulepitaliṅgaṁ buddhivivardhanakāraṇaliṅgam .

सब सुगंधों से लेपित लिंग; बुद्धि बढ़ाने वाला लिंग;

सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥

siddhasurāsuravanditaliṅgaṁ tat praṇamāmi sadāśivaliṅgam .

सिद्धों, देवताओं और असुरों से वंदित लिंग — उस सदाशिव लिंग को प्रणाम।

४

कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।

kanakamahāmaṇibhūṣitaliṅgaṁ phaṇipativeṣṭitaśobhitaliṅgam .

सोने और महामणियों से भूषित लिंग; नागराज से लिपटा, शोभित लिंग;

दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥

dakṣasuyajñavināśanaliṅgaṁ tat praṇamāmi sadāśivaliṅgam .

दक्ष के यज्ञ का विनाश करने वाला लिंग — उस सदाशिव लिंग को प्रणाम।

५

कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।

kuṅkumacandanalepitaliṅgaṁ paṅkajahārasuśobhitaliṅgam .

कुमकुम और चंदन से लेपित लिंग; कमलों की माला से सुशोभित लिंग;

सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥

sañcitapāpavināśanaliṅgaṁ tat praṇamāmi sadāśivaliṅgam .

संचित पापों का नाश करने वाला लिंग — उस सदाशिव लिंग को प्रणाम।

६

देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।

devagaṇārcitasevitaliṅgaṁ bhāvairbhaktibhireva ca liṅgam .

देवगणों से भाव और भक्ति के साथ पूजित और सेवित लिंग;

दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥

dinakarakoṭiprabhākaraliṅgaṁ tat praṇamāmi sadāśivaliṅgam .

करोड़ों सूर्यों जैसी प्रभा वाला लिंग — उस सदाशिव लिंग को प्रणाम।

७

अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।

aṣṭadalopariveṣṭitaliṅgaṁ sarvasamudbhavakāraṇaliṅgam .

आठ दलों वाले कमल पर विराजमान लिंग; सबकी उत्पत्ति का कारण लिंग;

अष्टदरिद्रविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥

aṣṭadaridravināśanaliṅgaṁ tat praṇamāmi sadāśivaliṅgam .

आठों प्रकार की दरिद्रता का नाश करने वाला लिंग — उस सदाशिव लिंग को प्रणाम।

८

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् ।

suragurusuravarapūjitaliṅgaṁ suravanapuṣpasadārcitaliṅgam .

देवगुरु और श्रेष्ठ देवताओं से पूजित लिंग; देवताओं के उपवन के फूलों से सदा पूजित लिंग;

परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥

parātparaṁ paramātmakaliṅgaṁ tat praṇamāmi sadāśivaliṅgam .

परे से भी परे, परमात्मा-स्वरूप लिंग — उस सदाशिव लिंग को प्रणाम।

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ ।

liṅgāṣṭakamidaṁ puṇyaṁ yaḥ paṭhet śivasannidhau .

जो इस पुण्य लिंगाष्टक को शिव जी के समीप पढ़ता है,

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥

śivalokamavāpnoti śivena saha modate .

वह शिवलोक पाता है और शिव जी के साथ आनंदित होता है।