মুক্তিত নিস্পৃহ যিটো সেহি ভকতক নমো
जो मुक्ति की भी इच्छा नहीं रखता, उस भक्त को नमस्कार;
ৰসময়ী মাগোহো ভকতি।
मैं रस से भरी भक्ति माँगता/माँगती हूँ।
সমস্ত মস্তক মণি নিজ ভকতৰ বশ্য
जो सबके मस्तक के मणि हैं, फिर भी अपने भक्तों के वश में हैं —
ভজো হেন দেৱ যদুপতি॥
ऐसे देव यदुपति का मैं भजन करूँ।
যাৰ ৰাম-কৃষ্ণ নাম নাৱে ভৱসিন্ধু তৰি
जिनके राम और कृष्ण नाम की नाव से भवसागर पार होता है,
পাৱে পৰমপদ পাপী যত।
और सारे पापी भी परमपद पाते हैं।
সদানন্দ সনাতন হেনয় কৃষ্ণক সদা
ऐसे सदा आनन्दमय, सनातन कृष्ण की
উপাসা কৰোহো হৃদয়ত॥
मैं हृदय में सदा उपासना करूँ।
