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श्लोक · शिव जी

करचरणकृतं

1 पंक्तियाँ · Shiva Manasa Puja, verse 5; Stotra Ratnavali, Gita Press

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शिव जी

शिव जी

शांत स्वरूप; सोमवार के देवता

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥

प्रभो! मैंने हाथ, पैर, वाणी, शरीर, कर्म, कर्ण, नेत्र अथवा मनसे जो भी अपराध किये हों; वे विहित हों अथवा अविहित, उन सबको आप क्षमा कीजिये। हे करुणासागर श्रीमहादेव शङ्कर! आपकी जय हो।