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आरती · माँ दुर्गा

दुर्गे दुर्घट भारी

18 पंक्तियाँ · बोलने में लगभग 1 मिनट · Traditional Marathi aarti-sangrah

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माँ दुर्गा

माँ दुर्गा

नवरात्रि की देवी

दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी।

हे दुर्गे, आपके बिना यह संसार बहुत कठिन है।

अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी॥

हे अनाथों की नाथ अंबे, अपनी करुणा हम पर फैलाइए।

वारी वारीं जन्ममरणाते वारी।

जन्म-मरण के चक्र को दूर कीजिए, दूर कीजिए, दूर कीजिए।

हारी पडलो आता संकट नीवारी॥

हम हारकर गिर पड़े हैं; अब हमारा संकट दूर कीजिए।

जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथनी।

जय देवी, जय देवी! महिषासुर का मर्दन करने वाली माँ, आपकी जय हो।

सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी॥

आप श्रेष्ठ देवताओं और ईश्वर को वर देने वाली हैं; आप तारने वाली, जीवन देने वाली संजीवनी हैं।

त्रिभुवनी भुवनी पाहता तुज ऐसी नाही।

तीनों लोकों में देखें तो आप जैसी कोई नहीं।

चारी श्रमले परंतु न बोलवे काही।

चारों वेद थक गए, फिर भी आपका वर्णन न कर सके।

साही विवाद करितां पडिले प्रवाही।

छहों शास्त्र वाद-विवाद करते-करते प्रवाह में बह गए।

ते तूं भक्तालागी पावसि लवलाही॥

वही आप अपने भक्त के लिए तुरंत दौड़ी चली आती हैं।

जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथनी।

जय देवी, जय देवी! महिषासुर का मर्दन करने वाली माँ, आपकी जय हो।

सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी॥

आप श्रेष्ठ देवताओं और ईश्वर को वर देने वाली हैं; आप तारने वाली, जीवन देने वाली संजीवनी हैं।

प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासां।

हे प्रसन्नमुखी, आप अपने दासों पर प्रसन्न होती हैं।

क्लेशापासूनि सोडी तोडी भवपाशा॥

आप उन्हें क्लेशों से छुड़ाती हैं और संसार के बंधन काट देती हैं।

अंबे तुजवाचून कोण पुरविल आशा।

हे अंबे, आपके बिना हमारी आशा कौन पूरी करेगा?

नरहरि तल्लीन झाला पदपंकजलेशा॥

नरहरि आपके चरण-कमलों के अंश मात्र में लीन हो गए हैं।

जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथनी।

जय देवी, जय देवी! महिषासुर का मर्दन करने वाली माँ, आपकी जय हो।

सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी॥

आप श्रेष्ठ देवताओं और ईश्वर को वर देने वाली हैं; आप तारने वाली, जीवन देने वाली संजीवनी हैं।

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