1. पाठ
  2. आरतियाँ
  3. आरती कीजै हनुमान लला की

आरती · हनुमान जी

आरती कीजै हनुमान लला की

24 पंक्तियाँ · बोलने में लगभग 3 मिनट · Traditional aarti (public domain)

WhatsApp
हनुमान जी

हनुमान जी

बल और भक्ति; मंगलवार और शनिवार

आरती कीजै हनुमान लला की।

हनुमान लला की आरती कीजिए,

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जो दुष्टों का दलन करने वाले, रघुनाथ जी की शक्ति हैं।

जाके बल से गिरिवर काँपे।

जिनके बल से बड़े-बड़े पर्वत काँपते हैं,

रोग दोष जाके निकट न झाँके॥

रोग और दोष जिनके पास नहीं फटकते।

अंजनि पुत्र महा बलदाई।

अंजनी के पुत्र, महाबल देने वाले,

संतन के प्रभु सदा सहाई॥

संतों के प्रभु, सदा उनके सहायक।

दे बीरा रघुनाथ पठाए।

रघुनाथ जी ने बीड़ा देकर भेजा,

लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका जलाकर सीता जी की सुधि लाए।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई।

लंका किला थी, समुद्र उसकी खाई,

जात पवनसुत बार न लाई॥

पवनपुत्र को पार जाने में देर न लगी।

लंका जारि असुर संहारे।

लंका जलाकर असुरों का संहार किया,

सियारामजी के काज सँवारे॥

सीताराम जी का काम सँवारा।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।

लक्ष्मण जी मूर्छित पड़े थे,

आनि संजीवन प्राण उबारे॥

संजीवनी लाकर उनके प्राण बचाए।

पैठि पाताल तोरि जम-कारे।

पाताल में पैठकर यम के बंधन तोड़े,

अहिरावन की भुजा उखारे॥

अहिरावण की भुजाएँ उखाड़ दीं।

बाएँ भुजा असुर दल मारे।

बाईं भुजा से असुर दल मारा,

दाहिने भुजा संतजन तारे॥

दाहिनी भुजा से संतों को तारा।

सुर नर मुनि आरती उतारें।

देवता, मनुष्य और मुनि आरती उतारते हैं,

जय जय जय हनुमान उचारें॥

जय जय जय हनुमान पुकारते हैं।

कंचन थार कपूर लौ छाई।

सोने के थाल में कपूर की लौ छाई है,

आरती करत अंजना माई॥

माता अंजना आरती कर रही हैं।

जो हनुमानजी की आरती गावे।

जो हनुमान जी की आरती गाता है,

बसि बैकुंठ परम पद पावे॥

वह बैकुंठ में बसकर परम पद पाता है।

हनुमान जी के और पाठ

हनुमान जी