देवाचिये द्वारीं उभा क्षणभरी ।
तेणें मुक्ति चारी साधियेल्या ॥
devāciye dvārīṁ ubhā kṣaṇabharī . teṇeṁ mukti cārī sādhiyelyā .
भगवान के द्वार पर क्षण भर भी खड़े रहने से चारों मुक्तियाँ सध जाती हैं।
हरि मुखें म्हणा हरि मुखें म्हणा ।
पुण्याची गणना कोण करी ॥
hari mukheṁ mhaṇā hari mukheṁ mhaṇā . puṇyācī gaṇanā koṇa karī .
मुख से 'हरि' कहो, मुख से 'हरि' कहो — उसके पुण्य की गिनती कौन करे?
असोनि संसारीं जिव्हे वेगु करी ।
वेदशास्त्र उभारी बाह्या सदा ॥
asoni saṁsārīṁ jivhe vegu karī . vedaśāstra ubhārī bāhyā sadā .
संसार में रहते हुए भी जीभ को नाम में तत्पर रखो — वेद और शास्त्र बाँहें उठाकर यही कहते हैं।
ज्ञानदेव म्हणे व्यासाचिया खुणा ।
द्वारकेचा राणा पांडवां घरीं ॥
jñānadeva mhaṇe vyāsāciyā khuṇā . dvārakecā rāṇā pāṁḍavāṁ gharīṁ .
ज्ञानदेव कहते हैं: व्यास की दी हुई पहचान यही है — द्वारका के राजा पांडवों के घर रहे।
