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मंत्र · माँ दुर्गा

अग्निदग्ध तर्पण

2 पंक्तियाँ · बोलने में लगभग 1 मिनट · Nirnaya Sindhu; Sampurna Karmakand Vidhi

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माँ दुर्गा

माँ दुर्गा

नवरात्रि की देवी

अग्निदग्धाश्च ये जीवा येऽप्यदग्धाः कुले मम।

मेरे कुल के वे जीव जिन्हें अग्नि ने लिया, और वे भी जिन्हें अग्नि नहीं मिली —

भूमौ दत्तेन तृप्यन्तु तृप्ता यान्तु परां गतिम्॥

वे भूमि पर दिए इस जल से तृप्त हों, और तृप्त होकर परम गति को प्राप्त हों।