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श्लोक

दीपं ज्योति परब्रह्म

4 पंक्तियाँ · Traditional household reading

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दीपं ज्योति परब्रह्म

दीपक की ज्योति परब्रह्म है;

दीपं सर्वतमोपहम् ।

दीपक सारा अँधेरा हर लेता है।

दीपेन साध्यते सर्वं

दीपक से सब कुछ सिद्ध होता है —

सन्ध्या दीप नमोऽस्तु ते ॥

संध्या के दीप, तुम्हें नमस्कार।

इन दिनों पर