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श्लोक

शुभंकरोती

11 पंक्तियाँ · Traditional; the Sandhya Deepa couplet and seven Marathi lines

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शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसम्पदा।

शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-सम्पदा देने वाली —

शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥

शत्रु-बुद्धि का नाश करने वाली दीपज्योति, तुम्हें नमस्कार।

दिव्या दिव्या दीपत्कार

हे दीये, हे दीये, जगमग ज्योति,

कानीं कुंडलें मोतीहार

कानों में कुंडल, मोतियों का हार;

दिव्याला पाहून नमस्कार

दीये को देखकर नमस्कार।

दिवा लावला देवांपाशी

देवताओं के पास दीया जलाया,

उजेड पडला तुळशीपाशीं

उसका उजाला तुलसी के पास पड़ा;

माझा नमस्कार सर्व देवांपाशी

सब देवताओं को मेरा नमस्कार।

तिळाचे तेल कापसाची वात

तिल का तेल, कपास की बाती।

दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः ।

दीप की ज्योति परब्रह्म है, दीप की ज्योति जनार्दन है।

दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तुते ॥

दीप मेरे पाप हर ले। संध्या के दीप, तुम्हें नमस्कार।