शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसम्पदा।
शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-सम्पदा देने वाली —
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
शत्रु-बुद्धि का नाश करने वाली दीपज्योति, तुम्हें नमस्कार।
दिव्या दिव्या दीपत्कार
हे दीये, हे दीये, जगमग ज्योति,
कानीं कुंडलें मोतीहार
कानों में कुंडल, मोतियों का हार;
दिव्याला पाहून नमस्कार
दीये को देखकर नमस्कार।
दिवा लावला देवांपाशी
देवताओं के पास दीया जलाया,
उजेड पडला तुळशीपाशीं
उसका उजाला तुलसी के पास पड़ा;
माझा नमस्कार सर्व देवांपाशी
सब देवताओं को मेरा नमस्कार।
तिळाचे तेल कापसाची वात
तिल का तेल, कपास की बाती।
दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः ।
दीप की ज्योति परब्रह्म है, दीप की ज्योति जनार्दन है।
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तुते ॥
दीप मेरे पाप हर ले। संध्या के दीप, तुम्हें नमस्कार।