सदा सर्वदा योग तूझा घडावा ।
सदा-सर्वदा तुम्हारा संग मिलता रहे;
तुझे कारणी देह माझा पडावा ।
मेरा यह शरीर तुम्हारे ही काम में लगे।
उपेक्षू नको गूणवंता अनंता ।
हे गुणवान, हे अनंत, मेरी उपेक्षा मत करना —
रघूनायका मागणे हेचि आतां ॥
हे रघुनायक, अब मेरी बस यही माँग है।
