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श्लोक · श्री राम

सदा सर्वदा

4 पंक्तियाँ · Samarth Ramdas, Karunashtake 26

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श्री राम

श्री राम

धर्म का साक्षात रूप

सदा सर्वदा योग तूझा घडावा ।

सदा-सर्वदा तुम्हारा संग मिलता रहे;

तुझे कारणी देह माझा पडावा ।

मेरा यह शरीर तुम्हारे ही काम में लगे।

उपेक्षू नको गूणवंता अनंता ।

हे गुणवान, हे अनंत, मेरी उपेक्षा मत करना —

रघूनायका मागणे हेचि आतां ॥

हे रघुनायक, अब मेरी बस यही माँग है।