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श्लोक · सूर्य देव

सूर्य अर्घ्य

2 पंक्तियाँ · Gita Press, Nityakarma-Pujaprakash

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सूर्य देव

सूर्य देव

सूर्य देव; सुबह का अर्घ्य

एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते ।

हे सूर्य देव, आइए — सहस्र किरणोंवाले, तेज के भंडार, जगत के स्वामी —

अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर ॥

मुझ पर कृपा कीजिए, हे दिवाकर, और भक्ति से दिया यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए।