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आरती · शनि देव

आरती श्री शनि देव जी की (१)

10 पंक्तियाँ · 51 Chalisa Sangraha evam Aartiyan (Randhir Prakashan, Haridwar), book p58

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शनि देव

शनि देव

शनिवार के देवता; तेल का दीया

जय जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी,

सूर्य पुत्र प्रभुछाया महतारी॥

श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी,

नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी,

मुक्तन की माल गले शोभित बलिहारी॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी,

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

देव दनुज ऋषि मुनी सुमिरत नर नारी,

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥