ब्रह्मा जी ने सृष्टि बना दी थी और वह मौन थी। उसमें कुछ भी यह नहीं कह सकता था कि वह क्या है।
तब उन्होंने वीणा लिए एक स्त्री को बनाया, और उन्होंने एक बार तार पर गज फेरा। उसी एक स्वर से संसार को वाणी मिली — पक्षी, नदी, उसमें बहती हवा, सब उसी क्षण शुरू हुए।
इसीलिए उनके हाथ में पुस्तक और वीणा है, शस्त्र नहीं — और इसीलिए घर में जो कुछ सीखा जाता है, कोई लिपि, कोई राग, कोई हुनर, वह इस दिन के पास होने पर किसी और दिन शुरू नहीं होता।
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