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कार्तिगई दीपम · कथा

जिस स्तंभ के छोर नहीं थे

कार्तिगै की कृत्तिका को हर सीढ़ी और हर मुँडेर पर दीपों की पंक्तियाँ — वही रात जब तिरुवण्णामलै में अग्नि का स्तंभ खड़ा हुआ और उसका कोई छोर नहीं मिला।

ब्रह्मा जी और विष्णु जी में विवाद था कि दोनों में बड़ा कौन है। उनके बीच अग्नि का स्तंभ उठा और एक स्वर ने कहा: जो इसका छोर पा ले, वही बड़ा।

विष्णु जी वराह बनकर नीचे गए। ब्रह्मा जी हंस बनकर ऊपर। दोनों को कुछ नहीं मिला। विष्णु जी लौटकर यही कह दिया; ब्रह्मा जी लौटकर कहा कि उन्होंने शिखर पा लिया।

शिव जी स्तंभ से प्रकट हुए। विष्णु जी को, जिन्होंने स्वीकार किया, आशीर्वाद मिला; ब्रह्मा जी को, जिन्होंने नहीं किया, कहा गया कि उनका अपना मंदिर नहीं होगा।

तिरुवण्णामलै की पहाड़ी वही स्तंभ है, ठंडा हुआ। कार्तिगै को उसके शिखर पर अग्नि जलती है, और दक्षिण का हर घर अपनी पंक्तियों से उत्तर देता है।

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कार्तिगई दीपम

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कार्तिगई दीपम